Tuesday, December 6, 2022
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भिवानी में कुश्ती संघ की नई कार्यकारिणी का गठन, सभी संघों को एक करने का प्रयास

भिवानी/रवि जांगड़ा : भिवानी को बीते दो दशकों से मिनी क्यूबा का नाम मिला है। अब उसी मिनी क्यूबा में पुरानी कहावत दूध दही का खाना, देसां में देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा, को जिंदा करने और मुक्केबाजी के साथ कुश्ती के दांवपेंच दोहराने की नई पहल शुरु हुई है। ये पहल हरियाणा कुश्ती संघ ने शुरु की है।

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बता दें कि बीते दो दशकों से भिवानी में कुश्ती के पहलवानों के दांव पेंच कम और मुक्केबाजों के मुक्के की धमक ज्यादा सुनाई दे रही है। समय के साथ यहां कुश्ती के दंगल और दंगल लड़ने वाले पहलवान कम हो रहे हैं। कोरोना काल तो मानो कुश्ती और पहलवानों पर कहर बनकर टूटा हो। लेकिन हरियाणा कुश्ती संघ ने अब नई शुरुआत की है। ये शुरुआत सालों बाद भिवानी कुश्ती संघ की नई कार्यकारिणी ने की है। जिसमें सर्वसम्मति से सूर्य प्रकाश को संघ का जिला प्रधान, सुरेश मलिक को सचिव और श्यमासुंदर को खजांची की जिम्मेवारी देते हुए पूरी कार्यकारिणी का गठन किया गया है।

नई कार्यकारिणी का गठन करने पहुंचे हरियाणा कुश्ती संघ के पर्यवेक्षक बृषभान ने बताया कि भिवानी कुश्ती संघ की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि संघ के नए प्रधान और अन्य पदाधिकारी आपस में और अन्य लोगों से समन्वय स्थापित कर पहलवानों के लिए आर्थिक और अन्य जरूरत का सामान जुटाएंगे, जिससे कुश्ती और पहलवानों को बढावा मिलेगा। उन्होंने माना कि कोरोना काल में पहलवानों पर बहुत असर पड़ा है, लेकिन फिर भी पहलवान फिजिकली फिट हैं और उन्हें हर संभव मदद मिली तो वो आने वाले समय में बहुत अच्छा करके दिखाएंगे।

वहीं भिवानी कुश्ती संघ के नवनियुक्त जिला प्रधान सूर्य प्रकाश ने बताया कि उन्हें जो जिम्मेवारी मिली है उसे वो बहुत अच्छे से निभाएंगे और कोशिश करेंगे की समृद्ध लोगों और सरकार के साथ मिलकर कुश्ती के पहलवानों को आने वाले समस्याओं व परेशानियों को जल्दी से दूर किया जाए। उन्होंने बताया कि कुश्ती का खेल खत्म नहीं हुआ है, लेकिन आर्थिक व अन्य कमियों का असर जरूर पड़ा है जिसे अब समय रहते दूर किया जाएगा।

हरियाणा को किसान, जवान और पहलवानों का प्रदेश माना जाता है। ऐसे में कुश्ती संघ द्वारा कुश्ती और कुश्ती के पहलवानों को आगे लाने के लिए शुरु की ये मुहिम सराहनीय है। अब देखना होगा कि इस मुहिम के भविष्य में क्या परिणाम आते हैं। लेकिन संघों को एक करने का प्रयास सफल रहा तो ये पहलवानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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